आंवले का मुरब्बा - Amla Murabba Recipe

आज आपको आंबला का मुरब्बा बनाने की बेहद आसान बिधि (तरीका)बताएँगे। आंबले को गुणों का भंडार कहा जाता है, और यह हमारी सेहत के लिये बहुत लाभ कारी है। तो चलिए जानते है आंबला का मुरब्बब बनाने की रेसिपी. आमले का मुरब्बा बनाने के लिए हमें निम्न सामिग्री की आवश्य्कता होती है.
आंवले का मुरब्बा बनाने की सामग्री:-
  • 1 किलो फ्रेश आंबले
  • 1.5 किलो पिसी चीनी
  • 1/2 चम्मच फिटकरी का पाउडर
आंवले का मुरब्बा बनाने की विधि:-
01:- सबसे पहले ताज़ा फ्रेश आंबला ले, और उन्हें सादा पानी में भीगने के लिए दो दिन तक ढक कर रख दे।
02:- दो दिन बाद छलनी की सहायता से आंबालो का सारा पानी निकाल दे।
03:- पानी निकालने के बाद सारे आंबले को चाकू या किसी काँटे की सहायता से चारो तरफ से गोद ले यदि किसी आंबले में काला निशान है.
04:- अब सभी गुदे हुए आंबला में आधा चम्मच फिटकरी का पाउडर डाल कर मिलाये। और दुबारा से आंबालो में पानी भर कर ढक दे।
06:- फिटकरी बाले पानी में भी आंबलो को दो दिन तक भीगने दे।
05:- दो दिन बाद फिटकरी बाला पानी निकाल कर आंबलो को सादा पानी में अच्छे तरह से धो ले..
06:- आंबलो को 2 मिनट तक गर्म पानी में रखने के बाद छलनी से छान ले। और खुली हवा में 10 मिनट के लिए फैला दे (जिससे आंबलो के ऊपर का पानी सूख जाये ऐसा करने से आंबले के मुरब्बे में फफूंद नही लगती है।)
07:- अब सभी आंबले को साफ़ और सूखे बर्तन में कर ले और पिसी चीनी डाल कर अच्छी तरह से मिला दे।
8:- चीनी में मिक्स आंबलो को 6-7 घंटे के लिए ढक कर रख दे, जिससे आंबलो में चीनी का जूस तैयार हो जाये।
9:- 6 घंटे के बाद आप देखेंगे कि आंबलो में चीनी घुल चुकी है अब आप गैस ऑन करके आंबलो को रखे और चीनी गाढ़ी होने तक लगातार चलाये हुए पकाये।
10:- आंबलो को पकाते समय चेक करे यदि आपकी एक तार की चाशनी तैयार हो गयी है। तब आपका आंबला का मुरब्बा तैयार है। अब गैस बंद कर दे। (ध्यान रहे कि आंबले का मुरब्बा लोहे के बर्तन में न पकाये जिससे मुरब्बा काला पड़ जाता है। आप स्टील या एल्युमीनियम के बर्तन में पकाये।
11:- अब आंबले के मुरब्बे को ठंडा होने दे, फिर साफ़ और सूखे शीशे के जार में भर कर रखे यह कम से कम एक 1साल तक ख़राब नही होगा।
उपयोगी सुझाव:-
  • इस मुरब्बे को आप एक वर्ष तक रख कर खा सकते हैं।
  • मुरब्बा बनाते समय आप जो भी बर्तन प्रयोग कर रहे हैं उन सबको सूखा होना चाहिए।
  • मुरब्बे को कांच के जार में स्टोर करें।
  • पंद्रह दिनों के अंतराल में मुरब्बे को (ऊपर-नीचे) चलाते रहें।